🔱 मंत्र
शिव ध्यान (ध्यायेन्नित्यं महेशं)

शिव ध्यान (ध्यायेन्नित्यं महेशं)

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ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं
रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
पद्मासीनं समन्तात्स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं
विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥

अर्थ / लाभ
चाँदी के पर्वत जैसे श्वेत, सुंदर चन्द्रमा से सुशोभित, रत्नों के आभूषणों से दमकते, हाथों में परशु, मृग, वरमुद्रा और अभयमुद्रा धारण किए, प्रसन्न, पद्मासन में बैठे, देवताओं से स्तुत, बाघंबर पहने, जगत के आदि और बीज, सब भयों के हरने वाले पंचमुख त्रिनेत्र महेश का नित्य ध्यान करना चाहिए। परंपरा: शिव पूजन के आरंभ में ध्यान श्लोक।