🔱 मंत्र
सरस्वति नमस्तुभ्यं

सरस्वति नमस्तुभ्यं

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सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥

अर्थ / लाभ
हे वर देने वाली, इच्छानुसार रूप धारण करने वाली सरस्वती! आपको नमस्कार। मैं विद्या का आरंभ करता हूँ, मुझे सदा सिद्धि प्राप्त हो। परंपरा: पढ़ाई शुरू करने से पहले और वसंत पंचमी पर।