सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
अर्थ / लाभ
हे वर देने वाली, इच्छानुसार रूप धारण करने वाली सरस्वती! आपको नमस्कार। मैं विद्या का आरंभ करता हूँ, मुझे सदा सिद्धि प्राप्त हो। परंपरा: पढ़ाई शुरू करने से पहले और वसंत पंचमी पर।
हे वर देने वाली, इच्छानुसार रूप धारण करने वाली सरस्वती! आपको नमस्कार। मैं विद्या का आरंभ करता हूँ, मुझे सदा सिद्धि प्राप्त हो। परंपरा: पढ़ाई शुरू करने से पहले और वसंत पंचमी पर।