🔱 मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं

कर्पूरगौरं करुणावतारं

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कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

अर्थ / लाभ
जो कपूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और जिनके गले में सर्पराज का हार है, जो सदा हृदय-कमल में बसते हैं, उन भवानी सहित भगवान शिव को मैं नमस्कार करता हूँ। आरती के बाद यह मंत्र पढ़ा जाता है।