🔱 मंत्र
कर दर्शन मंत्र (प्रातः)

कर दर्शन मंत्र (प्रातः)

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कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥

अर्थ / लाभ
हथेली के अगले भाग में लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल में गोविंद का वास है; इसलिए प्रातः उठकर अपनी हथेलियों के दर्शन करने चाहिए। परंपरा: सुबह बिस्तर से उठने से पहले।