नवग्रह स्तोत्र (वेदव्यास)
देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम्।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥
अर्थ / लाभ
देवताओं और ऋषियों के गुरु, स्वर्ण के समान कांति वाले, बुद्धिस्वरूप और तीनों लोकों के स्वामी बृहस्पति को मैं नमन करता हूँ। परंपरा: गुरुवार को गुरु ग्रह की शांति के लिए।
देवताओं और ऋषियों के गुरु, स्वर्ण के समान कांति वाले, बुद्धिस्वरूप और तीनों लोकों के स्वामी बृहस्पति को मैं नमन करता हूँ। परंपरा: गुरुवार को गुरु ग्रह की शांति के लिए।