🔱 मंत्र
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः

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गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

अर्थ / लाभ
गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही महेश्वर हैं। गुरु साक्षात् परब्रह्म हैं, ऐसे श्रीगुरु को नमस्कार है। गुरु पूर्णिमा और गुरुवार को पढ़ा जाता है।