🔱 मंत्र
द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः

द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः

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यजुर्वेद 36.17

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः।
वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

अर्थ / लाभ
द्युलोक, अंतरिक्ष, पृथ्वी, जल, औषधियाँ, वनस्पतियाँ, सब देवता, ब्रह्म और सब कुछ शांत रहे; वही शांति मुझे भी प्राप्त हो। परंपरा: हवन और पूजा के अंत में शांति पाठ।