नवग्रह स्तोत्र (वेदव्यास)
दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥
अर्थ / लाभ
दही, शंख और हिम के समान श्वेत, क्षीरसागर से उत्पन्न, शिवजी के मुकुट के आभूषण चन्द्रमा (सोम) को मैं नमन करता हूँ। परंपरा: सोमवार को चन्द्र ग्रह की शांति के लिए।
दही, शंख और हिम के समान श्वेत, क्षीरसागर से उत्पन्न, शिवजी के मुकुट के आभूषण चन्द्रमा (सोम) को मैं नमन करता हूँ। परंपरा: सोमवार को चन्द्र ग्रह की शांति के लिए।