🔱 मंत्र
भद्रं कर्णेभिः शान्ति पाठ

भद्रं कर्णेभिः शान्ति पाठ

अपनों के साथ शेयर करें
WhatsApp Facebook X Telegram

ऋग्वेद 1.89.8-9 / मुण्डक उपनिषद्

ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः।
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः॥
स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

अर्थ / लाभ
हे देवताओ! हम कानों से शुभ सुनें, आँखों से शुभ देखें, स्थिर अंगों और शरीर से आपकी स्तुति करते हुए देवताओं द्वारा दी गई आयु को भोगें। इंद्र, पूषा, तार्क्ष्य और बृहस्पति हमारा कल्याण करें। परंपरा: उपनिषदों के आरंभ में शांति पाठ।