🔱 मंत्र
अतुलितबलधामं (हनुमान स्तुति)

अतुलितबलधामं (हनुमान स्तुति)

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श्रीरामचरितमानस, सुंदरकांड

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

अर्थ / लाभ
अतुलनीय बल के धाम, स्वर्ण पर्वत जैसी देह वाले, दैत्य रूपी वन के लिए अग्नि, ज्ञानियों में अग्रणी, सब गुणों के भंडार, वानरों के स्वामी और श्रीराम के प्रिय भक्त वायुपुत्र हनुमान को मैं नमन करता हूँ। परंपरा: सुंदरकांड के आरंभ का श्लोक।