🔱 मंत्र
अखण्डमण्डलाकारं (गुरु वंदना)

अखण्डमण्डलाकारं (गुरु वंदना)

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गुरु गीता

अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

अर्थ / लाभ
जिन्होंने उस परम पद का दर्शन कराया जो अखंड मंडलाकार है और संपूर्ण चराचर में व्याप्त है, उन श्री गुरु को नमस्कार। परंपरा: गुरु पूर्णिमा और गुरुवार को।