गुरु गीता
अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
अर्थ / लाभ
अज्ञान के अंधकार से अंधे हुए व्यक्ति की आँखें जिन्होंने ज्ञान रूपी अंजन की शलाका से खोल दीं, उन श्री गुरु को नमस्कार। परंपरा: विद्यारंभ और गुरु पूर्णिमा पर।
अज्ञान के अंधकार से अंधे हुए व्यक्ति की आँखें जिन्होंने ज्ञान रूपी अंजन की शलाका से खोल दीं, उन श्री गुरु को नमस्कार। परंपरा: विद्यारंभ और गुरु पूर्णिमा पर।