होम › कहानियाँ › गणेश जी की परिक्रमा और बुद्धि की जीत
🐘

गणेश जी की परिक्रमा और बुद्धि की जीत (Ganesh and the Parikrama)

गणेश जी और कार्तिकेय के बीच संसार की परिक्रमा की प्रतियोगिता की कथा, जिसमें बुद्धि और माता-पिता के सम्मान की महिमा बताई गई है।

एक दिन शिव-पार्वती के पुत्र गणेश और कार्तिकेय में बहस हुई कि दोनों में कौन श्रेष्ठ है। माता-पिता ने कहा, "जो पहले पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करके आएगा, उसकी जीत होगी।"

कार्तिकेय अपने मोर पर बैठकर तुरंत निकल पड़े। गणेश जी का वाहन छोटा सा मूषक था, जिसकी गति धीमी थी। फिर भी वे शांत मन से सोचने लगे।

गणेश जी ने माता पार्वती और पिता शिव को एक स्थान पर बिठाया और उनकी श्रद्धा से परिक्रमा की। फिर हाथ जोड़कर बोले, "मेरे लिए तो आप ही संपूर्ण संसार हैं।"

शिव-पार्वती उनकी बुद्धि और भक्ति से बहुत प्रसन्न हुए। जब कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटे तो देखा कि गणेश पहले से वहाँ विराजमान हैं। माता-पिता ने गणेश को विजेता घोषित किया।

तभी से हर शुभ कार्य के आरंभ में गणेश जी की पूजा की परंपरा मानी जाती है। यह कथा बुद्धि और माता-पिता के सम्मान की महिमा का संदेश देती है।

🪔 सीख
शक्ति से अधिक बुद्धि और विवेक महत्वपूर्ण हैं। माता-पिता का सम्मान सबसे बड़ी पूजा है।

संबंधित आरती, कथा और पाठ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश जी का वाहन क्या है?
मूषक (चूहा)।
गणेश जी की पूजा सबसे पहले क्यों होती है?
परंपरा में उन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माना गया है, और इस कथा को भी इसी से जोड़ा जाता है।
इस कहानी का संदेश क्या है?
बुद्धि से किया गया निर्णय मेहनत और गति से भी बड़ा हो सकता है।

इसी श्रेणी की और कहानियाँ