त्रिकूट पर्वत के पास एक सुंदर सरोवर था, जहाँ हाथियों का राजा गजेंद्र अपने परिवार के साथ रहता था। गर्मी के दिन एक दिन वह सरोवर में स्नान करने उतरा।
तभी एक विशाल मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया। गजेंद्र ने पूरी शक्ति लगाई, परिवार ने भी खींचा, पर कोई सफल नहीं हुआ। संघर्ष में बहुत समय बीत गया और उसकी शक्ति घटने लगी।
जब सारे सहारे समाप्त हो गए तो गजेंद्र को अपने पूर्व जन्म की भक्ति याद आई। उसने सूँड़ में एक कमल का फूल उठाकर भगवान विष्णु को पुकारा और स्तुति की।
कथा के अनुसार भगवान विष्णु तुरंत गरुड़ पर सवार होकर आए। उन्होंने सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ का वध किया और गजेंद्र को संकट से मुक्त किया।
परंपरा में कहा जाता है कि शक्ति की सीमा समाप्त होने पर जब व्यक्ति पूर्ण समर्पण से पुकारता है, तब सहायता आती है। इसे शरणागति का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण माना जाता है।