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गजेंद्र मोक्ष की कथा (Gajendra Moksha)

संकट में फँसे हाथी गजेंद्र की पुकार और भगवान विष्णु के तुरंत आने की कथा, जो शरणागति की महिमा बताती है।

त्रिकूट पर्वत के पास एक सुंदर सरोवर था, जहाँ हाथियों का राजा गजेंद्र अपने परिवार के साथ रहता था। गर्मी के दिन एक दिन वह सरोवर में स्नान करने उतरा।

तभी एक विशाल मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया। गजेंद्र ने पूरी शक्ति लगाई, परिवार ने भी खींचा, पर कोई सफल नहीं हुआ। संघर्ष में बहुत समय बीत गया और उसकी शक्ति घटने लगी।

जब सारे सहारे समाप्त हो गए तो गजेंद्र को अपने पूर्व जन्म की भक्ति याद आई। उसने सूँड़ में एक कमल का फूल उठाकर भगवान विष्णु को पुकारा और स्तुति की।

कथा के अनुसार भगवान विष्णु तुरंत गरुड़ पर सवार होकर आए। उन्होंने सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ का वध किया और गजेंद्र को संकट से मुक्त किया।

परंपरा में कहा जाता है कि शक्ति की सीमा समाप्त होने पर जब व्यक्ति पूर्ण समर्पण से पुकारता है, तब सहायता आती है। इसे शरणागति का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण माना जाता है।

🪔 सीख
अपनी शक्ति पर भरोसा रखें, पर अहंकार नहीं। कठिनाई में विनम्रता से ईश्वर या सही व्यक्ति से मदद माँगने में संकोच न करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गजेंद्र मोक्ष कहाँ से लिया गया है?
यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण में आती है।
गजेंद्र ने भगवान को कैसे पुकारा?
सूँड़ में कमल का फूल उठाकर।
यह कथा किसे सुनाई जाती है?
कठिन समय में धैर्य और विश्वास रखने की सीख के लिए।

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