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वामन अवतार और राजा बलि (Vamana and King Bali)

वामन रूप में भगवान विष्णु और दानवीर राजा बलि की कथा, जो अहंकार के त्याग और वचन के सम्मान का उदाहरण है।

असुर राजा बलि, प्रह्लाद के पौत्र, अत्यंत दानशील और पराक्रमी थे। उन्होंने तीनों लोकों पर विजय पा ली थी। देवता चिंतित होकर भगवान विष्णु के पास पहुँचे।

विष्णु ने वामन नामक बौने ब्राह्मण का रूप लिया और बलि के यज्ञ में पहुँचे। बलि ने उनका स्वागत किया और कहा, "जो चाहें माँगिए।" वामन ने केवल तीन पग भूमि माँगी।

बलि के गुरु शुक्राचार्य ने उन्हें सावधान किया कि यह साधारण ब्राह्मण नहीं है। पर बलि अपने वचन पर अडिग रहे और कहा कि दान देते समय पीछे नहीं हटना चाहिए।

वामन ने अपना आकार इतना बढ़ाया कि एक पग में पृथ्वी और दूसरे में आकाश नाप लिया। तीसरे पग के लिए कोई स्थान नहीं बचा। तब बलि ने सिर झुकाकर कहा, "प्रभु, तीसरा पग मेरे सिर पर रखिए।"

वामन ने उनके सिर पर पग रखा और बलि को सुतल लोक का राज्य दिया। बलि की भक्ति और वचन-निष्ठा से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें वरदान भी दिया। केरल में ओणम को बलि की वार्षिक भेंट से जोड़ा जाता है।

🪔 सीख
अहंकार सबसे बड़ा बंधन है, जबकि वचन और विनम्रता व्यक्ति को ऊँचा करते हैं। सच्चा दान बिना हिचक के दिया जाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वामन किसके अवतार हैं?
भगवान विष्णु के पाँचवें अवतार।
ओणम से इसका क्या संबंध है?
केरल में मान्यता है कि राजा बलि हर वर्ष अपनी प्रजा से मिलने आते हैं, जिसे ओणम के रूप में मनाया जाता है।
बलि किसके पौत्र थे?
प्रह्लाद के पौत्र।

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